चुड़धार

भूगोल- यह उत्तर में 30º 52' तथा पूर्व में 77º 32' है और 3647 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

जलवायु परिचय- गरमीयों में मनोहर तथा सर्दियों में ठंडा।

सिरमौर में चुरधार शिवालीक पर्वतीय सीमाओं में से एक मोहक पर्वत है जिसकी ऊँचाई 11965 फूट है ( यह दक्षिण हिमाचल में सबसे ऊँची चोटी है), चुरधार सामान्यत: चूड़ीचादनी के नाम से जाना जाता है(बर्फ की चुड़ी) और ये क्षेत्र कुछ बड़े ही शानदार और सुन्दर प्राकृतिक दृश्यों से आशीशीत है। शिखर से इसका दृश्य मानों बर्फ से ढकी पर्वतीय सीमाओंं और दक्षिण की ओर तराई क्षेत्रों के बड़े परिदृश्य को गले लगाता है। इसके उत्तर की ओर गड़वाल क्षेत्र के  बदरीनाथ और केदारनाथ की चोटियां भी सम्मिलित है यह विश्वास किया जाता है कि ये वही स्थान है जहां हनुमान जी ने ज्यों का त्यों कर देने वाली संजीवनी बुटी को खोज निकाला था जिससे लक्ष्मण जी को होश आ गया था जो प्रभु राम के छोटे भाई थे। दुन्दी देवी के नीकट एक बहुत पुराने नगर के विनाश को खोजा गया है इस हिमालय की ढलान जड़ी बुटियों और सुन्दर पर्वतीय वृक्ष वन्सपती से सम्पन्न है। ऊँचाई के ज़गलों में श्रवदन्त कसतुरी हिरन और खतरनाक पर्वतीय काले भालु पाए जाते है। पर्वतीय शिखर से नीचे सरिगुल का चौकोर मन्दिर है जिसमें शिवलिंग भी है ये मन्दिर एक मंजिल और इसकी छत देवदार की लकड़ी की बनी है। ये मन्दिर शिवजी के नाम पर समर्पीत है जो चुरेशवर महादेव के नाम से भी जाना जाता है इस प्राचीन मन्दिर में नवरातरों के मेले के दौरान तीर्थ यात्री यात्रा करते है और रात को नाचते है। चुरधार शिखर पर बहुत भारी बर्फ़ बारी होती है (औसतन 33 फुट बर्फ़) और इसके शिखर पर शिकारी हवा के बहाव को देकते हुए रास्ता बनाते है। प्राय सरिगुल मन्दिर भारी बर्फ़ के नीचे दब जाता है साफ मौसम में आप बदरीनाथ, केदारनथ के तीर्थ स्थल, गंगा की तराइयां,सतलुज नदी,शिमला की पहाड़ीयां और चकराता जैसी खुबसुरत जगहाओं का दृश्य देख सकते है।

वहां तक कैसे पहुंचे-  चोटी के ऊपर पोहुंचने के लिए रेणुका तेहसील के मुख्यालय से बाया सांगरा, भवाई, गन्धुरी और नौरा होकर जा सकते है। ये टेडा मेडा रास्ता और लगबग 48 कि.मी. का है। चोटी पर पोहुंचने के लिए दुसरा और आसान मार्ग वाया सोलन, राजगड़, मिनसरोड़ है। चोटी के आस-पास ही धर्मशालाओं की उचित व्यवस्थाएं है।